Elige una pista para reproducir
राहे भटक के भी
बातें उलझ के भी
मैं आऊँ तेरे पास
सारे हवाओं के भी
आगे रहूँ ना कहीं आज मैं
तेरे बिना
आदत बन गए हो
चाहत बन गए हो
आदत बन गए हो
ना जानू कल क्या होगा
बस आदत बन गए हो
बहाने बनाने लगे
चाह के भी न पाते
क्या यही आयत है?
छोड़ के भी ना छूटे
मान ही भी ना पाते
गहराइयों का ये समा
ये आसमां
अब है नहीं तेरा मेरा
बारिश का ये जहाँ
ये रास्ता
अब है नहीं तेरा मेरा
आदत बन गए हो
चाहत बन गए हो
आदत बन गए हो
ना जानू कल क्या होगा
बस आदत बन गए हो
उजाले का रंग उडाके
मान ही भी न पाते
कि आदत बनकर तुम
यूँ ही रह जाओगे