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चादर की सिलवटें, खोई हो तुम उनमें
मुस्कुराती सपनो में, एब्ब उतोगी एमेम ह्म
कुच्छ पल में
क्यूँ ना बनू मुसाफिर तेरी राहों में काफ़िर
बनके फिरा मैं खो गया, तुम जो मिले हो
कागज की कश्ती में, सागर की लहरों से
देख कर बेगराज, हम मिलें
क्यूँ ना बनू मुसाफिर तेरी राहों में काफ़िर
बनके फिरा मैं खो गया, तुम जो मिले हो ओ ओ ओ
सुनते थे हम यह तुम पे है सब फिदा
शामे मोहब्बत का तुम में है निशान
ख़ुसरो और घालिब के लब्जों की ज़ुबान
तुमसे कयामत तुमसे है यह जहाँ
अंगड़ाई करवटें एब्ब उतोगी एमेम ह्म
कुच्छ पल में
क्यूँ ना बनू मुसाफिर तेरी राहों में काफ़िर
बनके फिरा मैं खो गया, तुम जो मिले हो ओ ओ ओ