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छोर्या ने काबू कर ले अपनी अदाओं से
जादू नगरी से है या है मेरे टाउन से
छोरा फरेबी कोन्या रे पागल एभी कोण्या
कैसा नशा हुआ तुझको छूकर हवाओं में
तेरे आगे चांद भी फीका रे
तुझमें कोई दाग नहीं
जे ख्वाब से तू फेर ख्वाब में रहूं
चाहे आवे मने जाग नहीं
तेरे इश्क में इशा फंसा करे
चैन पड़े दिन रात नहीं
सपने में भी दिखे जा से
छोड़ के मैं जात नहीं
माशूका की मर्जी चाले
और आशिक के कुछ हाथ नहीं
मैं ते पागल होया फिरूं
पर तू करती एतबार नहीं
छोरी ने चोरी किया दिल छोरे का
तने करया से कत्ल सारा चिल छोरे का
तू और बता तने और किस किस किस में गिनाऊ
तने भूक प्यास नींद करया किल छोरे का
दोष लाऊँ तेरे पे या साजि में रहूं
दुखी आऊं दउ या दुःख साथी में रहूं
तू मिल के गोरी इस बात पे रोऊँ
तू मिली इस बात पे राजी में रहूं
तेरे इश्क जाल में इशा फंसा रे
तू भी मिली न में खुद में रहा
गाल तेरी में इब घर ले लिया मन्ने
जा की इब दिखे झाँक तेरी
देखे रोजाना मैं देखन आऊं
सुन कर्मा सी शान तेरी
घणी कसूती खटके से तू
तू मांगे जे जान तेरी
माशूका की मर्जी चाले
और आशिक के कुछ हाथ नहीं
मैं ते पागल होया फिरूं
पर तू करती एतबार नहीं