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कुछ बोलके खामोशियाँ तड़पाने लगी हैं
चुप रहने से मजबूरियाँ याद आने लगी हैं
कुछ बोलके खामोशियाँ तड़पाने लगी हैं
चुप रहने पे मजबूरियाँ याद आने लगी हैं
तू भी मेरी तरह हंस ले
आँसू पलकों पे थाम के
तू भी मेरी तरह हंस ले
आँसू पलकों पे थाम के
जितनी है खुशी यह भी अश्कों में ना बह जाए
अखियों के झरोखों से, मैने देखा जो सांवरे
तुम दूर नज़र आए, बड़ी दूर नज़र आए
बंद करके झरोखों को, ज़रा बैठी जो सोचने
मन में तुम्हीं मुस्काये, मन में तुम्हीं मुस्काये