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आ आ आ, तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी
हैरान हूँ मैं
ओ हैरान हूँ मैं
तेरे मासूम सवालों से परेशान हूँ मैं
ओ परेशान हूँ मैं
तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी
हैरान हूँ मैं
ओ हैरान हूँ मैं
जीने के लिये सोचा ही नही
दर्द सम्भालने होंगे
जीने के लिये सोचा ही नही
दर्द सम्भालने होंगे
मुस्कुराऊँ तो
मुस्कुराने के कर्ज़ उतारने होंगे
ओ मुस्कुराऊँ कभी तो लगता है
जैसे होंठों पे कर्ज़ रखा है
ओ तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी
हैरान हूँ मैं ओ हैरान हूँ मैं
The tribute to Anup Ghoshal sir
दादा Gulzar and R. D.Burman,Jatinder Singh
आज अगर भर आई हैं
बूँदें बरस जायेंगी
आज अगर भर आई हैं
बूँदें बरस जायेंगी
कल क्या पता
इनके लिये आँखें तरस जायेंगी
ओ जाने खुद गुम हुवा कहाँ खोया
एक आँसू छुपाके रखा था
ओ तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी
हैरान हूँ मैं
ओ हैरान हूँ मैं
तेरे मासूम सवालों से परेशान हूँ मैं
ओ परेशान हूँ मैं
ओ परेशान हूँ मैं
ओ परेशान हूँ मैं