Elige una pista para reproducir
एक पल समझने में दो पल की देरी हुई, हाँ
उस पल में सब हो गया
था यारों ने कहा, "इशक़ है बड़ा कमीना"
मैंने ना की थी परवाह
घूमे नज़ारे नज़रों के आगे
मैं ठहरा रहा
सुनता नहीं है ऊँची पुकारें
ये दिल बहरा हुआ
कोई गिन के बताए मेरी सारी ख़ताएँ
हैं उनकी क्या सज़ाएँ, ये कसर भी रह ना जाए
फिर तो ये आलम है कि कोई भी आए-जाए
अब हमको ना सताए, जो भी होना है हो जाए
हाँ, हर दिन ख़यालों में, उलझा सवालों में
तेरे हवाले से, जानाँ
चाहे तू क्या, मगर मैं तो हूँ बेख़बर
फिरता हूँ दर-ब-दर, जानाँ
था जुनूँ, था नशा, बेफ़िकर था जहाँ
बेकली हर घड़ी है, मुझे क्या हुआ?
एक पल समझने में दो पल की देरी हुई, हाँ
उस पल में सब हो गया
था यारों ने कहा, "इशक़ है बड़ा कमीना"
मैंने ना की थी परवाह
घूमे नज़ारे नज़रों के आगे
मैं ठहरा रहा
सुनता नहीं है ऊँची पुकारें
ये दिल बहरा हुआ
घूमे नज़ारे नज़रों के आगे
मैं ठहरा रहा
सुनता नहीं है ऊँची पुकारें
ये दिल बहरा हुआ
घूमे नज़ारे नज़रों के आगे
मैं ठहरा रहा
सुनता नहीं है ऊँची पुकारें
ये दिल बहरा हुआ