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पोरे पोरे दरदिया उठल रहे, सखी रे दियवा बुतल रहे
धईले जब पाजा शरमा गईनी सखी रे, सैया के समान से छेदा गईनी सखी रे
सैया के समान से छेदा गईनी सखी रे – 2
के ओठवा के चूस लेले , खजाना के लुट लेले, समझ ढोरिये के ओखली धान ओं में कूट लेले
धीरे धीरे पूरा गरमा गईनी सखी रे,
सैया के समान से छेदा गईनी सखी रे -2
पलंग करे चोए चोए, खेलाव के मोये मोये, धनञ्जय सैया के डरे हम लगनी रोये रोये
पलंग करे चोए चोए, खेलाव के मोये मोये, सैया मिशाइल के चलते हम लगनी रोये रोये
बतिया में हम त भरमा गईनी सखी रे
सैया के समान से छेदा गईनी सखी रे -2