एक ख्वाब था जो तुमने तोडा है
मुझसे जो यूँ ये रस्ता मोड़ा है
अब दरबदर मैं ढूंढता हु सुकून
तुम जो ना हो मैं किससे ये कहूं
अकेला मैं अकेला हु
अकेला मैं अकेला क्यूँ
ये मंज़िले खो गयी है कहा
मेरी ख्वाहिशें बिखरी है हर जगह
तेरे कदमो के निशान की तलाश है
तेरे चेहरे की एक झलक ही बस है
किस्मतो से मैं लड़ा हूँ
कांटो पर यूँही खड़ा हूँ
चीखें मेरी कानो में
क्या सुन रहा है तू
अकेला मैं अकेला हु
अकेला मैं अकेला क्यूँ
अकेला मैं अकेला हु
अकेला मैं अकेला क्यूँ