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मैं ये हाथ जो तेरे हाथ पे रख दूँ
क्या चलेगा फ़लक तलक तू?
मैं हूँ कतरा, तू मेरी नदिया
क्या बहेगा सागर तलक तू?
मैं ये हाथ जो तेरे हाथ पे रख दूँ
हर साँस जो तेरे नाम भी लिख दूँ
तुझ पे एक नज़्म सी थी जो लिखी
पन्ने ले गई वो हवा
है तो छिपा, ढूँढो तो तुम जवाब
नैनों की बनी दो दराज़
पर्दे शर्म की दीवारें
इन में मिलता दरवाज़ा ना
दिल है अधखुला लिफ़ाफ़ा
मैं ये हाथ जो तेरे हाथ पे रख दूँ
हर साँस जो तेरे नाम भी लिख दूँ
हर सुबह खुली आँखें तेरी पहलू में
दुनिया के बनाए सारे ग़म भी सहलूँ मैं
पतझड़, सावन, बहार आए आ जाए
तेरी लकीरों में मेरा नसीबा
मैं ये हाथ जो तेरे हाथ पे रख दूँ
क्या चलेगा फ़लक तलक तू?
मैं हूँ कतरा, तू मेरी नदिया
क्या बहेगा सागर तलक तू?
मैं ये हाथ जो तेरे हाथ पे रख दूँ
हर साँस जो तेरे नाम भी लिख दूँ