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आ आ आ आ आ (आ आ आ)
रब की बातें बस रब ही है जानदा
लिखा जो लकीरों में वोही पहचानदा (वो ही पहचानदा)
आ आ आ आ आ (आ आ आ)
रब की बातें बस रब ही है जानदा
लिखा जो लकीरों में वोही पहचानदा
पास रहके दूरी हमको जीते जी है मारदी
सुखी सुखी लगती है रूत यह बहार दी
टूटी हुई यारी ढोला जोड़ जोड़ हारी ढोला
इश्क़ दी जुड़ती नयो डोर वे इससे समझाए कैसे
मानने ना मनाया ये कैसे चलता नही दिल पे ज़ोर वे
आ आ आ आ आ (आ आ आ)
रब की बातें बस रब ही है जानदा
लिखा जो लकीरों में वोही पहचानदा (वो ही पहचानदा)
रब की बातें बस रब ही है जानदा
वक़्त का मिज़ाज़ क्या है वोही पहचानदा
आते जाते झोको से कभी मौसम बदल जावे
दुआओं वाले आँसुओं से पत्थर पिघल जावे
आँख सौ उम्मीदे लेके इश्क़ वाले सपने देखें
डरती हूँ जाए ना यह टूट वे
चैन बेचैन हो जावे हाए मेरा जी घबरावे
माने के ना माही जावे रूठ वे (आ आ आ)
रब की बातें बस रब ही जानदा
लिखा जो लकीरों में वोही पहचानदा (आ आ आ)
आ आ आ आ (आ आ आ) वोही पहचानदा