नमश्कार दोस्तों
एक हास्यवन का शेर कहना चाहुगा पहले
के सुना है तुम्हारे चाहने वाले बहुत हैं (वाह)
सुना है तुम्हारे चाहने वाले बहुत हैं
ये इश्क़ की मिठाई सब में बांट दी तुमने (वाह क्या बात है)
सुना है तुम्हारे चाहने वाले बहुत हैं
ये इश्क़ की मिठाई सब में बांट दी तुमने
और सचमुच बहोत पक्की डोर है तेरी बेवफाई की
सुना है रकीब की पतंग काट दी तूने (वाह क्या बात है)
और और एक शेर कहना चाहुगा
गहरा शेर है, अनुपम भाई
की कुछ तो जला होगा
यू बेवजह धुआ तो न हुआ होगा
की कुछ तो जला होगा
यू बेवजह धुआ तो न हुआ होगा
जिसे डरते हैं ख्वाब में देखने से भी
वो हादसा हकीकत में जैसे हुआ होगा
और मेरे हाथ कांपते हैं उसकी तस्वीर को छूते हुए
ए दोस्त वो गैर के साथ हम बिस्तर कैसे हुआ होगा (क्या बात है)
और होके हम बिस्तर गैर से इठला कर जो तू आ रहीं हैं (क्या बात है)
होके हम बिस्तर गैर से इठला कर जो तू आ रहीं हैं
दूर चली जा मुझसे तुझसे रकीब की बू आ रही है (वाह क्या बात है)
एक प्रेमिका थी हमारी शादी कर रही थी
हमे भी नहीं बताया, हम पहुंच गए
क्यों की दावत तो हम मरे गिरे में नहीं छोड़ते
वो तो ज़िन्दी थी, मज़ाक से हटके मुझे नहीं
इत्तला नहीं थी वो शादी कर रही है
मै उसके कमरे में गया वो दुल्हन के जोड़े में तैयार थी
मै अंदाजा नहीं लगा पाया, तब भी सुनियेगा, अनुपम भाई
इतना क्यों सजाया है खुद को कुछ अलग बात है क्या (वाह)
इतने करीब क्यू आ रही हो हिज्र की रात है क्या (वाह वाह)
घर में बहुत चहल पहल है खुशियों की सौगात है क्या
यह क्या देख रही हो खिड़की में से तुम्हारी बारात है क्या (वाह वाह)
यह क्या देख रही हो खिड़की में से तुम्हारी बारात है क्या
और बिस्तर से खुशबू कुछ जानी पहचानी आ रही है
बिस्तर से खुशबू कुछ जानी पहचानी आ रही है
मेरे ही गुलदस्ते के गुलाब है क्या (वाह)
और अब कुछ कमिया बताई जा रही है मेरी
मै उनके जवाब दे रहा हु
बहुत पेचीदा हो तुम कान्हा (वाह क्या बात है)
बहुत पेचीदा हो तुम कान्हा
वो खुली किताब है क्या
बहुत पेचीदा हो तुम कान्हा
वो खुली किताब है क्या
तुम में कुछ अलग बात नहीं
वो नयाब हैं क्या (वाह वाह)
कहती है सो रंग है तुम्हारे
कहती है सो रंग है तुम्हारे
वो बेनकाब है क्या
और फाड़ आयी हो मेरी मोहब्बत की वसीयत को
फाड़ दी जो मेरी मोहब्बत की वसीयत
अब वो मुझसे भी क़ीमती कागज़ात है क्या (वाह वाह)
और ये last के दो शेर खुदारी के है
आकाश भाई को नज़र करना चाहुगा
और कहती हैं तुमसे ज्यादा प्यार करता है
कहती हैं अब वो मुझसे भी क़ीमती कागज़ात है क्या
और कहती हैं तुमसे ज्यादा प्यार करता है
इतनी औक़ात है क्या (वाह वाह)
कहती हैं तुमसे ज्यादा प्यार करता है
उसकी इतनी औक़ात है क्या
और रकीब का सहारा लेकर
कान्हा को भुला दूंगी
रकीब का सहारा लेकर
कान्हा को भुला दूंगी
अरे तेरा दिमाग खराब है क्या (वाह वाह)
और की कहती हैं तुमसे ज्यादा प्यार करता है
कहती हैं तुमसे ज्यादा प्यार करता है
उसकी औक़ात है क्या
और रकीब का सहारा लेकर
कान्हा को भुला दूंगी
रकीब का सहारा लेकर
कान्हा को भुला दूंगी
तेरा दिमाग खराब है क्या (वाह वाह)
अंत में एक शेर कहना चाहुगा
के यह कैसा सितम था उनका
यह कैसा सितम था उनका
कुछ पलों की मोहब्बत के लिए
मुझे सालों आजमाया गया (वाह वाह)
यह कैसा सितम था उनका
कुछ पलों की मोहब्बत के लिए
मुझे सालों आजमाया गया
उन्होंने पहले मेरी फांसी मुकर्रर कर दी
अदालत मुझे बाद मे ले जाया गया (वाह वाह)