Elige una pista para reproducir
कुछ ना कहो, कुछ भी ना कहो
कुछ ना कहो, कुछ भी ना कहो
क्या कहना है, क्या सुनना है
मुझको पता है, तुमको पता है
समय का ये पल थम सा गया है
और इस पल में कोई नहीं है
बस एक मैं हूँ, बस एक तुम हो
कुछ ना कहो, कुछ भी ना कहो
कितने गहरे हलके, शाम के रंग हैं छलके
परबत से यूँ उतरे बादल, जैसे आँचल ढलके
आ आ आ आ
आ आ
सुलगी सुलगी साँसे, बहकी बहकी धड़कन
महके महके शाम के साए, पिघले पिघले तन मन
और इस पल में कोई नहीं है
बस एक मैं हूँ, बस एक तुम हो
बस एक मैं हूँ, बस एक तुम हो
कुछ ना कहो, कुछ भी ना कहो