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पगले मन पगले मन
तु रो रो किसे सुनाए
पगले मन पगले मन
तु रो रो किसे सुनाए
इस नगरी में देख हुआ है
न्याय और अन्याय
न्याय और अन्याय
कौवों को तू हंसे कहे जा
कौवों को तू हंसे कहे जा
और कांटों को फूल
और कांटों को फूल
उनका दोष नहीं है कोई
किस्मत की है भूल
कोई जो पूछे कल थे अपने
कोई जो पूछे कल थे अपने
आज हुए जो पराए
आज हुए जो पराए
पगले मन पगले मन
तु रो रो किसे सुनाए
इस नगरी में देख हुआ है
न्याय और अन्याय
न्याय और अन्याय
कंकर के टुकड़ों को चाहे
ताज पे अपने लगाए
ताज पे अपने लगाए
कंकर के टुकड़ों को चाहे
ताज पे अपने लगाए
ताज पे अपने लगाए
और हीरों को जान के पत्थर
और हीरों को जान के पत्थर
खाख में या मिलाए
खाख में या मिलाए
जिसमें हिम्मत जो उनको
जाके ये समझाए
जाके ये समझाए
पगले मन पगले मन
तु रो रो किसे सुनाए
इस नगरी में देख हुआ है
न्याय और अन्याय
न्याय और अन्याय
जो भी जुर्म करे वो तुझपे
चुपके चुपके सहना
चुपके चुपके सहना
टुकड़े टुकड़े हो जाना पर
टुकड़े टुकड़े हो जाना पर
मुंह से कुछ न कहना
मुंह से कुछ न कहना
छुरी भी फेरे गर्दन पर तो
मुंह से ना निकले हाय
मुंह से ना निकले हाय
पगले मन पगले मन