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याद है वो दिन जब हम मिले
बातों में ऐसे दोनों बहे
कहना जो चाहते कैसे कहें
यादों में दोनों लिपटे हुए
क्यूँ होता है ऐसे कभी
जब कुछ भी ना बोलूँ तो सुनता कोई
क्यूँ होता है ऐसे कभी
जब कुछ भी ना चाहूँ तू मिलता तभी
कैसे, कैसे समझाऊँ तुम्हें
दिल की जो कमी है, अंदर दबी है
चलो ना मेरे तुम साथ में
देखेंगे वो क्या कहेंगे
मेरे इस दिल को भी हुई है आदत
ज़रूर ये आँखों की, मैं खो गई
क्यूँ होता है ऐसे कभी
जब कुछ भी ना बोलूँ तो सुनता कोई
क्यूँ होता है ऐसे कभी
जब कुछ भी ना चाहूँ तू मिलता तभी
कैसे, कैसे समझाऊँ तुम्हें
मेरी आँखों में देखो ना
आँखों में क्या है ये रखा, क्या है रखा
करना क्या सोचो ना, डरना ना
क्या करना सोचो ना, डरना ना, हाँ-हाँ