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तन में जलन
कुच्छ ऐसी हो गयी
हन टन में जलन
कुच्छ ऐसी हो गयी
मैं तेरे ख्वाबों में
तेरी ही बाहों में
जाने कब सो गयी
तन में जलन
कुच्छ ऐसी हो गयी
तन में जलन
कुच्छ ऐसी हो गयी
हर पल नयी बेखुदी है
उसपे मेरी कमसिनी
मदहोशियों का ये
मौसम उसपे तेरी आशिक़ी
धड़कन गाने लगी
नगमे तेरे सनम
मस्ती छ्चाने लगी
बहके मेरे कदम
तन में जलन
कुच्छ ऐसी हो गयी
तन हाहाहा में जलन
हा हा हा कुच्छ ऐसी हो गयी
अब तेरे बिन एक दिन भी
सदियों सा लगने लगा
तुझसे ही ये पूचछती हूँ
तूने क्या जादू किया
सुन आए जान-ए-वफ़ा
आँचल जो यह ढाला
इसकी क्या है वजह
तुझको है पता
तन … आह हा आ नहां
तन में जलन
कुच्छ ऐसी हो गयी
तन में जलन
कुच्छ ऐसी हो गयी
मैं तेरे ख्वाबों में
तेरी ही बाहों में
जाने कब सो गयी
तन में जलन ऐसी हो गयी
तन में जलन कुच्छ ऐसी हो गयी