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शब् की बाहों में सो जाए सुबह
खाबों को तेरे पलकों पे दूं सज़ा
ये री री ओह
हम
शब् की बाहों में सो जाए सुबह
खाबों को तेरे पलकों पे दूं सज़ा
गूंजे साँसों में तेरी ही सदा
मैं लब्ज तेरा तू है मेरी जुबान
शैतानियाँ रात भर
करले आ टूट कर
बदमाशियाँ रात भर
करले आ टूट कर
मिलना तेरा मिलना मेरा
मिलना था किस्मत में लिखा
मंज़िल भी थी मीलों जुड़ा
राहे मिली जो तू मिला
तू रुबारु है आरज़ू
आ भी जा बाहों में तू ज़रा
शैतानियां रात भर
करले आ टूट कर
बदमाशियां रात भर
करले आ टूट कर
साथ तेरे चलता चलूं
अंजान राहों पे यूँही
रिश्ता कोई सदियों का था
अपना लगे है तू कहीं
तू ही सज़ा तू ही दुआ
है मेरे जीने की तू वजह
शतानियाँ रात भर
करले आ टूट कर
बदमाशियाँ रात भर
करले आ टूट कर