बस खुदा से है इतनी शिकायत
क्यूं तू मेरा हुआ ही नहीं
कुछ लम्हों की मांगी थी मोहलत
क्यों तू मेरा हुआ ही नहीं
हाँ मैं माँगूं इजाजत हाँ करके बग़ावत
तू मेरा हुआ ही नहीं
मैंने मांगी थी तुझसे वह सांसें
जिनमें बस्ती हैं सांसें मेरी
बस खुदा से है इतनी शिकायत
क्यूँ तू मेरा हुआ ही नहीं
मुझे अगर तेरी याद आये
कैसे किसे हम बताएं हाँ
जी कर भी कैसे जियूं मैं
हक़ में नहीं ये हवाएं
फासले फैसलों की वजह थे
इश्क़ का मिल हुआ ही नहीं
बस खुदा से है इतनी शिकायत
क्यूँ तू मेरा हुआ ही नहीं