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तेरी आवारगी में गर
सुबह से शाम हो जाए
तेरी आवारगी में गर
सुबह से शाम हो जाए
तो फिर क्यूँ ना गली कूछो
में तू बदनाम हो जाए
तेरी आवारगी में गर
सुबह से शाम हो जाए
बहोट चाहा किसी सूरत
हूमें आराम हो जाए
बहोट चाहा किसी सूरत
हूमें आराम हो जाए
मगर मुमकिन नहीं उनके
बिना ये काम हो जाए
तो फिर क्यूँ ना गली कूछो
में तू बदनाम हो जाए
तेरी आवारगी में गर
सुबह से शाम हो जाए
उजाले रफ़्ता रफ़्ता डोर
होते जेया रहे है अब
उजाले रफ़्ता रफ़्ता डोर
होते जेया रहे है अब
ना जाने कब हुमारी
ज़िंदगी की शाम हो जाए
तो फिर क्यूँ ना गली कूछो
में तू बदनाम हो जाए
तेरी आवारगी में गर
सुबह से शाम हो जाए
किसे मालूम कल महफ़िल
में आना हो-ना हो अपना
किसे मालूम कल महफ़िल
में आना हो-ना हो अपना
चलो शोला हुमारे
साथ भी एक जाम हो जाए
तो फिर क्यूँ ना गली कूछो
में तू बदनाम हो जाए
तेरी आवारगी में गर
सुबह से शाम हो जाए
तो फिर क्यूँ ना गली कूछो
में तू बदनाम हो जाए
तेरी आवारगी में गर
सुबह से शाम हो जाए