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हमको मिली यूँ मोहब्बत
सरफिरे की थी क़िस्मत
नाराज़ हो कर जहाँ से
दिल रुका उसके दर पर
उसने की फिर मनमर्ज़ी
बे-इख़्तियारी सी मोहब्बत
शौक़ शायद हम उनके
उसकी तलब इस क़दर अब
ना ख़बर इस जहाँ की
शुरू क़ाफ़िला-ए-मोहब्बत
है हक़ीक़त ख़्वाबों सी
ख़ुद को भूलूँ मैं हर पल
Oh-oh-oh-oh, oh-oh
Oh-oh-oh-oh, oh-oh
हमको फिर यूँ बदल के
कहे, "पहले से नहीं तुम"
मेरा यार करे मनमर्ज़ी
उसकी तलब इस क़दर अब
फ़रार दिल जो क़ैदों से
गुम उस नज़र के पिंजरे में
उस अदा के बादल में
उड़ना चाहूँ मैं हर पल
पिघले अरमाँ उनके साए में
रंजिशें ना कोई, ना ख़ुद से, ना जहाँ से
पिघले अरमाँ उनके साए में
रंजिशें ना कोई, ना ख़ुद से, ना जहाँ से
फ़रार दिल जो क़ैदों से
गुम उस नज़र के पिंजरे में
उस अदा के बादल में
उड़ना चाहूँ मैं हर पल
Oh-oh-oh-oh, oh-oh
Oh-oh-oh-oh, oh-oh
Oh-oh-oh-oh, oh-oh
Oh-oh-oh-oh, oh-oh
हमको मिली यूँ मोहब्बत
सरफिरे की थी क़िस्मत
सरफिरे की थी क़िस्मत
सरफिरे की थी क़िस्मत
सरफिरे की थी क़िस्मत
सरफिरे की थी क़िस्मत