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आज मगन मैं अपने भाग्य पर
बगिया खिली मन मधु बन में
चमका सुरज सुहाना ऐसा
भोर हुई नव जीवन की
पहली किरण सूरज की गिरी है
मेरे अंगना में
पहली किरण सूरज की गिरी है
मेरे अंगना में
प्रीतम प्रेम की बाजे सरगम
प्रीतम प्रेम की बाजे सरगम
मेरे कंगना में
पहली किरण सूरज की गिरी है
मैं हूँ सुहागन बड़ी दुर्भागन
पति प्रेम से भरी भरी
मैं हूँ सुहागन बड़ी दुर्भागन
पति प्रेम से भरी भरी
उषा ने सिंदूर से अपने
कजल मेरी मांग भरी
दूर गगन से स्वर्ग गिरा है
मेरे अंगना में
पहली किरण सूरज की गिरी है
जुग जुग से मेरी प्यास बुझी
नव रस इस जीवन में रसे
जुग जुग से मेरी प्यास बुझी
नव रस इस जीवन में रसे
पति चरणों में सब तीर्थ हैं
चारों धाम मेरे घर में बसे
काशी, मथुरा, गंगा, यमुना मेरे आंगन में
पहली किरण सूरज की गिरी है
मेरे कंगना में
प्रीतम प्रेम की बाजे सरगम
मेरे कंगना में
पहली किरण सूरज की गिरी है