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तेरे प्यार ने सर-ए-आम बदनाम कर दिया मुझे
शराब का गुलाम कर दिया मुझे
ना जी रहा हूँ, ना मैं मर सका
ऐसा मेरा हश्र है बन गया
जो पहले मयख़ाना था, वो घर है बन गया
कि अब तो साक़ी ने भी जाम का हिसाब ना रखा
दर्द होता है, दर्द होने दो
ज़ख्म गहरा है, इसे रहने दो
दिल जलता है, दिल जलने दो
याद आई है,तेरे प्यार ने सर-ए-आम बदनाम कर दिया मुझे
शराब का गुलाम कर दिया मुझे
ना जी रहा हूँ, ना मैं मर सका
ऐसा मेरा हश्र है बन गया
जो पहले मयख़ाना था, वो घर है बन गया
कि अब तो साक़ी ने भी जाम का हिसाब ना रखा
दर्द होता है, दर्द होने दो
ज़ख्म गहरा है, इसे रहने दो
दिल जलता है, दिल जलने दो