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तू ढूँढता है जिसको
बस्ती में या के बन में
वह सांवरे सलोने रहता है
रहता है तेरे मन में
तू ढूंढता है
मस्जिद में मंदिरों में
पर्बत के केन्द्रों में
मस्जिद में मंदिरों में
पर्बत के केन्द्रों में
नदियों के पानियों में
गहरे समन्दरों में
लहरा रहा है वही
लहरा रहा है वही
खुद अपने बांकपन में
वह सांवरे सलोने रहता है
रहता है तेरे मन में
तू ढूंढता है
हर ज़र्रे में रमा है
हर फूल में बसा है
हर ज़र्रे में रमा है
हर फूल में बसा है
हर चीज़ में उसी का
जलवा झलक रहा है
हरकत वो कर रहा है
हरकत वो कर रहा है
हर एक के तन बदन में
वह सांवरे सलोने रहता है
रहता है तेरे मन में
तू ढूंढता है
क्या खोया क्या था पाया
क्यूँ भाए क्यों न भाया
क्यों सोचे जा रहा है
क्या पाया क्या न पाया
सब छोड़ दे उसी पर
सब छोड़ दे उसी पर
बस्ती में रहे के बन में
वह सांवरे सलोने रहता है
रहता है तेरे मन में
तू ढूंढता है