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मैं क्यों उदास हूँ
नाराज़ क्यों है दिल
मुझसे कभी तो
ये पूछ ले
दिल में है क्या मेरे
ये दूँ बता तुझे
पर न मिटेंगे
ये फ़ासले
बहुत बोलती हैं, आँखें मेरी
बहुत बोलती हैं, आँखें मेरी
मगर इनकी बातें
तू समझा नहीं
तेरे बिना मैं कुछ भी कर सकता हूँ
मगर मेरे लिए, तू है ज़िंदगी
तेरे बिना मैं कुछ भी कर सकता हूँ
मगर मेरे लिए, तू है ज़िंदगी
तेरे बिना मैं कुछ भी कर सकता हूँ
मगर मेरे लिए, तू है ज़िंदगी
वो ख़्वाब बेवजह थे
बेवजह थे मेरे आँसू
और बातें थीं सभी बेवजह
सपने देखे सारे झूठे
झूठे वादे जो थे तेरे
रो के मुझको तूने दी है क्यों सज़ा
बहुत बोलती हैं, साँसें मेरी
बहुत बोलती हैं, साँसें मेरी
मगर इनकी बातें
तू समझा नहीं
तेरे बिना मैं कुछ भी कर सकता हूँ
मगर मेरे लिए, तू है ज़िंदगी
तेरे बिना मैं कुछ भी कर सकता हूँ
मगर मेरे लिए, तू है ज़िंदगी