दो विदा दो प्राण मुझको
दो विदा दो प्राण, दो विदा दो प्राण
दो विदा दो प्राण मुझको
दो विदा दो प्राण
आज से मैं हूँ तेरा परदेश वासी मीत
बुझ के तारों पर बजेगा प्राण का संगीत
सुनता तो वो राग तो घनसार अपनी भी मिलाना
सुनता तो वो राग तो घनसार अपनी भी मिलाना
दो विदा दो प्राण मुझको
दो विदा दो प्राण, दो विदा दो प्राण
ले हँसे भरपूर हैं हम, हाँ, ले हँसे भरपूर हैं हम
फिर कहो, कब दूर हैं हम? फिर कहो, कब दूर हैं हम?
याद मैं आऊँ तुम्हें तो धीर अपना ना गँवाना
याद मैं आऊँ तुम्हें तो धीर अपना ना गँवाना
दो विदा दो प्राण मुझको
दो विदा दो प्राण, दो विदा दो प्राण
सच नहीं तो झूठ भी कब हैं हमारे वज्र तक में
भूल में हँसी, निर्झरों में बह रहे हैं प्यार अपने
आँसुओं को पी के, साक़ी, मोतियों में मुस्कुराना
आँसुओं को पी के, साक़ी, मोतियों में मुस्कुराना
दो विदा दो प्राण मुझको
दो विदा दो प्राण, दो विदा दो प्राण
दो विदा दो प्राण...