ज़िंदगी की इस भीड़ मे ही में चल रहा हू एक ख्वाब लेके
जो दिल मे है वो बात लेके
एहसास लेके कोई राज़ लेके
सवाल लेके एक आस लेके
हन बदलेगा एक दिन समा
हर घड़ी अब लड़ रहा हू
हर मोड़ पर मई निखार रहा हू
इन रास्तों की कहानियों को
किताब लेके मई पढ़ रहा हू
ये ख्वाहिशें नायाब लेके
में निकला हू मंज़िल जहाँ
तू आज़मा
खुद को ज़रा आज़मा
तक़दीर की रेत पर
तू अपने ख्वाबों की तस्वीर कोई बना
तू आज़मा
खुद को ना रोक यहाँ
तक़दीर की रेत पर
तस्वीर कोई बना
उम्मीदें ना हारे
जब दिल की खामोशियाँ
तरक़ीबें आशायें जीतेंगी तब बाज़ियाँ
महके तो महका रे
जज़्बे से तू आशियाँ
कुछ पल की है प्यारे वक़्त की नाराज़ियाँ
उलझानो से ही पूछ लेना तू सुलझाने ये रहती कहाँ पे
किस मोड़ पे खड़ी है सितारों सी
जगमगाती वो कश्टियाँ जो लेकर चलेंगी तुझको जहाँ पे उतरे ज़मीन पे आसमान
कह रही है तुझसे धनक की एक रंग है जो तुझमे छिपा
खड़ा डोर क्यूँ है उस नूवर से तू बेरंग सी इस दास्तान को रंगीन बना के देख ले कभी खुद को तू आज़मा
तू आज़मा
खुद को ज़रा आज़मा
तक़दीर की रेत पर
तू अपने ख्वाबों की तस्वीर कोई बना
तू आज़मा
खुद को ना रोक यहाँ
तक़दीर की रेत पर
तस्वीर कोई बना