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जब तक है जमीं
जब तक है आसमान
तुम मेरे ही रहो
बस इतना ही अरमान
तुझे बांध लू मैं आंचल में
जैसे चाँद रहे बादल में
हम जंचते हैं ऐसे जैसे
सजे नैन काजल में
महबूबा मैं तेरी महबूबा
महबूबा मैं तेरी महबूबा
महबूबा मैं तेरी महबूबा
महबूबा हो मैं तेरी महबूबा
(संगीत)
शूरू हो रही है नई मंजिलें
नई जिंदगी का सफर
शाम उतरे जहां चाँदनी ओढ़ कर
धूप बिखरी रहे जिस जगह रेत पर
इस जहां से परे आ कहीं हम चलें
रात लेटी रहे अपनी चादर तले
मैं गुड़िया बन जाउंगी
मेरे साथ तू खेलते रहना
कभी बाहों मे झूला झूलाना
कभी दिल से लगा लेना
महबूबा मैं तेरी महबूबा
महबूबा मैं तेरी महबूबा
महबूबा मैं तेरी महबूबा
महबूबा हो मैं तेरी महबूबा