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आ आ आ
तुम भी हो वही हम भी हैं वही
बात फिर अब लगती हैं नयी
क्या हुआ गलत और क्या सही
दोनों साथ हैं सच तो हैं यही
तुम भी हो वही हम भी हैं वही
बात फिर अब लगती हैं नयी
क्या हुआ गलत और क्या सही
दोनों साथ हैं सच तो हैं यही
यादे वो लगती रह गयी पीछे कहीं
ये प्यारे अब हमें आगे खींचे कहीं
ये दूर तक बेचैन हैं सब रास्ते
इस हाल में तू मुस्कुरा मेरे वास्ते
तुम भी हो वही हम भी हैं वही
बात फिर अब लगती हैं नयी
क्या हुआ गलत और क्या सही
दोनों साथ हैं सच तो हैं यही
अब दीन ढले चाहे जहाँ अब शाम हो
परवाह क्या अब चाहे जो अंजाम हो
वो आसमान हो या जमी हमने लिखा प्यार को हर कही
शीशे का हर एक पल इसमें छुपा हैं अपना कल
टूटे ना ये संभालो इसे
शीशे का हर एक पल इसमें छुपा हैं अपना कल
टूटे ना ये संभालो इसे
आ आ आ
तुम भी हो वही हम भी हैं वही
बात फिर अब लगती हैं नयी
क्या हुआ गलत और क्या सही
दोनों साथ हैं सच तो हैं यही