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है दिल मेरा तेरी रूह से लिपट जाने पे आमादा
है दिल मेरा तेरी रूह से लिपट जाने पे आमादा
हैरत है कि तू मेरे जिस्म से महकता है मुझसे ज़्यादा
है दिल मेरा तेरी रूह से लिपट जाने पे आमादा
हैरत है कि तू मेरे जिस्म से महकता है मुझसे ज़्यादा
ख़ुद से मेरा ये वजूद है सवाल कर रहा
मुझको क्यूँ तुझमें हूबहू मेरे जैसा कुछ दिख रहा
तुझको देखूँ तो आईना देखता हूँ, ये लग रहा
मुझको क्यूँ तुझमें हूबहू मेरे जैसा कुछ दिख रहा
तुझको देखूँ तो आईना देखता हूँ, ये लग रहा
परियों ने भी तेरे हुस्न से कुछ नूर है लिया
जैसे कर्ज़ पे
ऐसा लगे जैसे ख़ुदा कुछ बना रहा हो
यहाँ तेरी ही तर्ज़ पे
क़ायम तू कैसी-कैसी है मिसाल कर रहा
मुझको क्यूँ तुझमें हूबहू मेरे जैसा कुछ दिख रहा
तुझको देखूँ तो आईना देखता हूँ, ये लग रहा
मुझको क्यूँ तुझमें हूबहू मेरे जैसा कुछ दिख रहा
तुझको देखूँ तो आईना देखता हूँ, ये लग रहा
लम्हा मेरा कब से मुझे महसूस हो रहा, क्यूँ गिरफ़्त-सा
दिल का दरख़्त छूता हूँ तो एहसास हो रहा
जैसे सख़्त-सा
ख़ुद से ये कैसी मशक्कत मैं फ़िलहाल कर रहा
मुझको क्यूँ तुझमें हूबहू मेरे जैसा कुछ दिख रहा
तुझको देखूँ तो आईना देखता हूँ, ये लग रहा
मुझको क्यूँ तुझमें हूबहू मेरे जैसा कुछ दिख रहा
तुझको देखूँ तो आईना देखता हूँ, ये लग रहा