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रात एक किस्से में हुआ था ज़िक्र तेरा
बातों ही बातों में फिर होगया सवेरा
एक उदासी सी
वो ना गयी
शोर गुल धुए में गुज़र गया था सारा
रात को जो लौटा घर लगा थका थका सहारा
उदासी वो
वो ना गयी
चाय कि फिर पी गरम गरम प्याली
Cigaret टो के धुएँ में गुज़री थी रात सारी
उदासी वो
वो ना गयी
तेरी याद में
दिल में एक और श्याम गुज़रे
तेरी याद में
दिल में एक और श्याम गुज़रे
श्याम हुई रात
रात बनी सवेरा
एक और किस्से में हुआ था ज़िक्र तेरा
उदासी वो
वो ना गयी
तेरी याद
याद में
एक और श्याम गुज़रे
तेरी याद
याद में
एक और जाम गुज़रे
तेरी याद
याद में
एक और श्याम गुज़रे
तेरी याद
याद में
एक और जाम गुज़रे