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अजीब दास्ताँ है ये
कहा शुरू कहा ख़तम
ये मंजिले है कौन सी
ना वो समझ सके ना हम
अजीब दास्ताँ है यह
कहा शुरू कहा ख़तम
ये मंजिले है कौन सी
ना वो समझ सके ना हम
यह रौशनी के साथ क्यों
धुआं उठा चिराग से
यह रौशनी के साथ क्यों
धुआं उठा चिराग से
यह ख्वाब देखती हु मै
के जग पड़ी हूँ ख़्वाब से
अजीब दास्ताँ है ये
कहा शुरू कहा ख़तम
ये मंजिले है कौन सी
ना वो समझ सके ना हम
किसी का प्यार लेके तुम
नया जहाँ बसाओगे
किसी का प्यार लेके तुम
नया जहाँ बसाओगे
ये शाम जब भी आएगी
तुम हमको याद आओगे
अजीब दास्ताँ है ये
कहा शुरू कहा ख़तम
ये मंजिले है कौन सी
ना वो समझ सके ना हम
अजीब दास्ताँ है ये
कहा शुरू कहा ख़तम
ये मंजिले है कौन सी
ना वो समझ सके ना हम