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तेरे क्रूस की छाया में
जब जीवन की राहों में
मैं स्वयं से दूर हुआ
अहंकार की परछाईं में
मेरा मन विवश हुआ।
तब तेरी मौन वेदना ने
मेरा हृदय छू लिया
तेरे घावों की करुणा ने
मुझे फिर जीना सिखा दिया।
तेरी आँखों की शांति से
मेरा हर भय पिघल जाए
तेरे प्रेम की ज्वाला में
मेरा अभिमान जल जाए।
तेरे क्रूस की छाया में
मैं सिर झुकाकर आऊँ
अपने टूटे हुए मन को
तेरे चरणों में पाऊँ।
हे दयालु प्रभु
मुझ पर कृपा बरसा दे
मेरे भीतर की हर छाया
अपने प्रकाश से मिटा दे।
तपस्या के इस पावन समय में
मन पश्चाताप से भर जाए
उपवास और प्रार्थना के क्षणों में
आत्मा तेरे पास आए।
तेरी क्षमा की मधुर धारा
हर दोष को धो देती है
तेरी निस्वार्थ बलिदानी प्रीति
नई आशा संजो देती है।
जैसे सूखी धरती मेघों को पुकारे
वैसे मेरी आत्मा तुझे पुकारे
तेरी दया की वर्षा से
हर पीड़ा सँवर जाए।
तेरे क्रूस की छाया में
मैं नया जीवन पाऊँ
तेरे प्रेम की ज्योति से
आत्मा को सजाऊँ
हे करुणामय प्रभु
मुझे अपना बना ले
तेरे पुनरुत्थान की आशा से
मेरा विश्वास जगा दे
काँटों का मुकुट धारण कर
तूने प्रेम निभाया
मृत्यु के अंधकार में भी
जीवन दीप जलाया
तेरी निस्तब्धता में सामर्थ्य था
तेरी पीड़ा में प्रकाश
तेरे पवित्र लहू की हर बूँद में
मुक्ति का मधुर निवास।
मैं तेरा हूँ प्रभु
तेरे क्रूस की छाया में
मैं तेरा हो जाऊँ
मेरी हर श्वास में प्रभु
तेरा ही नाम गाऊँ।
हे दयामय उद्धारकर्ता
मुझे थामे रखना
इस पावन मार्ग पर
सदा संग ही चलना।