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रात खामोश, मजरा क्या है
यूँही शर्माएं, मामला क्या है
जलती आँखों में क्यों धुआं सा है
रात खामोश, मजरा क्या है
यूँही शर्माएं, मामला क्या है
रात खामोश
तेरी करवट में, घूम से जाएं ओ हुज़ूर
हो कहाँ से हम, ख़त्म और तुम शुरू ओ हुज़ूर
भूल जाएं फ़ासला, क्या है
सांस में इत्र, मजरा क्या है
जलती आँखों में क्यों धुआं सा है
रात खामोश
पैरों तले से, ज़मीं खिसके ओ ज़ालिम
पैरों तले से, ज़मीं खिसके ओ ज़ालिम
पूछते हो मियाँ, आसमां क्या
ग़ुमशुदा चाँद, माज़रा क्या है
जलती आँखों में क्यों धुआं सा है
रात खामोश, मजरा क्या है
यूँही शर्माएं, मामला क्या है
रात खामोश