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Sencillo / Pista
एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा, जैसे
खिलता गुलाब, जैसे
शायर का ख्वाब, जैसे
उजली किरन, जैसे
बन में हिरन, जैसे
चाँदनी रात, जैसे
नरमी की बात, जैसे
मन्दिर में हो एक जलता दिया, हो ओ
एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा, जैसे
सुबह का रूप, जैसे
सरदी की धूप, जैसे
वीणा की तान, जैसे
रंगों की जान, जैसे
बलखायें बेल, जैसे
लहरों का खेल, जैसे
खुशबू लिये आये ठंडी हवा, हो ओ