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ऐ मेरे यार, क्यूँ दिन बदल जाते हैं?
ये वक्त रुकता नहीं, बस लम्हे रह जाते हैं
ख़्वाबों भरे क्या दिन थे वो
काश आ जाए फ़िर गुज़रा ज़माना
ना फ़िक्र थी आगे कहीं
और ना पीछे था अपना ठिकाना
ये अपना याराना
ये अपना याराना
तेरे wallet से अपने हफ़्ते यूँ ही चुराना
कच्ची सी सड़कों पे
आधी रातों को गुलछर्रे उड़ाना
कुछ बिन कहे, कुछ बिन सुने
दिल जाने तुझको बाते बताना
ये दोस्ती बदले नहीं
फ़िर चाहे जितना बदले ज़माना
ये अपना याराना
ये अपना याराना
ये अपना यारा...
ये अपना याराना
हाँ, हाँ, हाँ
ये अपना याराना