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Sencillo / Pista
वहीं मिले तुम आज भी
अपनी ही सोच के सफ़र में
ख्वाबों से फरेब करके
फिर हक़ीक़त के असर में
ओढ़ कर सिलवटें कहते हो बस
नक़ाब है, नक़ाब है
हर परत पे बुना तेरी रूह का
हिसाब है, हिसाब है
तुम तुम हो तुमसे परे कहीं
तुम तुम भी और तुम तुम नहीं
तुम तुम भी और तुम तुम नहीं
रूह को महफूज़ रखने का
यह सौक तेरा अजीब है
वो उदास आँखों में तेरी
आधी हसी के वो करीब है
एक बार देख ले तू पहेली
तू जवाब है, तू जवाब है
तुम तुम हो तुमसे परे कहीं
तुम तुम भी और तुम तुम नहीं
तुम तुम भी और तुम तुम नहीं
चोट दिल ने सही
महके तेरी किताब हे
किताब हे
तुम तुम हो तुमसे परे कहीं
तुम तुम भी और तुम तुम नहीं
तुम तुम भी और तुम तुम नहीं