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शीशा श्राब शबनम कभी गुल कभी गुलबदन
शेर नगमा ग़ज़ल रागिनी कभी रत कभी चाँदनी
शीशा श्राब शबनम कभी गुल कभी गुलबदन
शेर नगमा ग़ज़ल रागिनी कभी रत कभी चाँदनी
यू सिमट कर बहो मे ज़रा राज़ जानिए
शीशा श्राब शबनम कभी गुल कभी गुलबदन
एक पर्दे को तुम आज उठाओ एक परदा गिराए हम
तुम तोड़ा चल कर नज़दीक आओ तोड़ा करीब आए हम
एक पर्दे को तुम आज उठाओ एक परदा गिराए हम
तुम तोड़ा चल कर नज़दीक आओ तोड़ा करीब आए हम
शीशा श्राब शबनम कभी गुल कभी गुलबदन
शेर नगमा ग़ज़ल रागिनी कभी रत कभी चाँदनी
चलो सुबह के होने से पहले एक नयी कहानी बनाए
तुमने जो हंपे जादू चलाया वही जादू तुम पे चलाए
चलो सुबह के होने से पहले एक नयी कहानी बनाए
तुमने जो हंपे जादू चलाया वही जादू तुम पे चलाए
यू सिमट कर बहो मे ज़रा राज़ जानिए
शीशा श्राब शबनम कभी गुल कभी गुलबदन
शेर नगमा ग़ज़ल रागिनी कभी रत कभी चाँदनी