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Sencillo / Pista
अजीब दास्ताँ है ये, कहाँ शुरू, कहाँ ख़तम
ये मंज़िलें हैं कौन सी, ना वो समझ सके, ना हम
अजीब दास्ताँ है ये, कहाँ शुरू, कहाँ ख़तम
ये मंज़िलें हैं कौन सी, ना वो समझ सके, ना हम
ये रोशनी के साथ क्यूँ धुआँ उठा चिराग़ से
ये रोशनी के साथ क्यूँ धुआँ उठा चिराग़ से
ये ख़्वाब देखती हूँ मैं कि जग पड़ी हूँ ख़्वाब से
अजीब दास्ताँ है ये, कहाँ शुरू, कहाँ ख़तम ओ ओ
ये मंज़िलें हैं कौन सी, ना वो समझ सके, ना हम