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साँझ की लाली, सुलग सुलग कर बन गई काली धूल
आये ना बालम बेदर्दी, मैं चुनती रह गई फूल
इंतज़ार और अभी, और अभी, और अभी
इंतज़ार और अभी, और अभी, और अभी
इंतज़ार और
रैन भाई, वो छल आँखियों में चुभने लागे तारे
देश में मैं परदेशन हो गई, जब से पिया सिधारे
जब से पिया सिधारे
इंतज़ार और अभी, और अभी, और अभी
इंतज़ार और अभी, और अभी, और अभी
इंतज़ार और
भोर भाई, पर कोई ना आया, सुनी सेज बसाने
तारे डूबे, दीपक बुझ गए
तारे डूबे, दीपक बुझ गए
राख हुए परवाने
इंतज़ार और अभी, और अभी, और अभी
इंतज़ार और अभी, और अभी, और अभी
इंतज़ार और