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नींद आती नहीं सारी सारी रात
कोई तुज से कहे मेरे दिल की बात
आयेक तू जो नहीं आज मेरे सात
मुझ को वीरान लगे सारी कयनत
तेरे और मेरे
रास्ते हों कभी ना जुड़ा ना जुड़ा
क्या जाने कोई ज़िंदा हैं कैसे
मेरी जान यह ज़िंदगी तो
हो रही हैं वीरान
तेरे बिन है जान ऐसे बदन में
जैसे तन्हा हो पंछी चमन में
नींद आती नहीं सारी सारी रात
कोई तुज से कहे मेरे दिल की बात
आयेक तू जो नहीं आज मेरे सात
मुझ को वीरान लगे सारी कयनत
में तो यहीं चाहूं दूरियाँ ना रहे
दूरियाँ दूरियाँ
वो आनसून भारी आँखों मैं घोले
दिन रात तो बारीशों में
भीगता था मेरे साथ
आँगनों में जो साए जवान थे
धूप में लोग जलताई कहाँ थे
नींद आती नहीं
नींद आती नहीं
नींद आती नहीं