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प्यार में भीगे, जो खत थे
हम वो सारे जला आएं
छुपके मिले थे, तुमसे जहाँ
राह वो सारी भुला आएं
जो था लिखा वो, होगा नहीं
वो कहानी, फिर कभी
अब हम मिलेंगे, ना कहीं
वो कहानी, फिर कभी
इस प्यार से तू, मुझको रिहा कर
रस्में जुदाई की, हँस के अदा कर
पास ना मेरे ग़म के सिवा कुछ
ये ज़िंदगी ना मुझपे फ़ना कर
सीने में मेरे दिल ही नहीं
वो कहानी, फिर कभी
अब हम मिलेंगे, ना कहीं
वो कहानी, फिर कभी
कैसी काली रात थी जिसने
सब कुछ मेरा छीन लिया है
जिसको बुना था हाथों से अपने
रिश्ता वो पल में टूट गया है
होगा सवेरा फिर से नहीं
वो कहानी फिर कभी
अब हम मिलेंगे ना कहीं
वो कहानी फिर कभी