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हमने माना आ
के तगाफूल ना करोगे लेकिन
खाक़ हो जाएँगे हम
तुमको खबर होने टक्क
खाक़ हो जाएगे हम
हुस्न-ए-घाम एक कसा
कासे च्छुता मेरे बाद
बारी आराम से है
आहल-ए-ज़फ़ा मेरे बाद
शमा बुझती है तो उसमे से
धुआँ आ आ उठता है आए
शोला-ए-इश्क़ सिया
पॉश हुआ मेरे बाआड़
घाम से मरता हो के
इतना नहीं दुनिया में कोई
क्यूँ करे ताज़ियत
मेहर-ओ-वफ़ा मेरे बाद
आए है बेकासी-ए
इश्क़ पे रोना गॅलाइब
इश्क़ घर जाएगा
सैलाब-ए-बाला मेरे बाद