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हंसा सुन्दर काया रो
मत करजे अभिमान रे
हंसा सुन्दर काया रो
मत करजे अभिमान
आखिर इक दिन जाणो है
मालिक रे दरबार
आखिर इक दिन जाणो है
सायब रे दरबार
हंसा सुन्दर काया रो
मत करजे अभिमान रे
हंसा सुन्दर काया रो
मत करजे अभिमान
आखिर इक दिन जाणो है
मालिक रे दरबार
आखिर इक दिन जाणो है
मालिक रे दरबार
गरब वास मे दुख पायो
जद हरि से करी पुकार रे
गरब वास मे दुख पायो
जद हरि से करी पुकार
पल भर बिसराहु नाहि रे
कोल वचन किरतार
पल भर बिसराहु नाहि रे
कोल वचन किरतार
हंसा सुन्दर काया रो
मत करजे अभिमान रे
हंसा सुन्दर काया रो
मत करजे अभिमान
आखिर इक दिन जाणो है
मालिक रे दरबार
आखिर इक दिन जाणो है
मालिक रे दरबार
आकर के संसार मे
कबहु ना भजियो राम रे
आकर के संसार मे
कबहु ना भजियो राम
तिरथ वरत ना किनो रे
नही कीनो सुकरत काज
तिरथ वरत ना किनो रे
नही कीनो सुकरत काज
हंसा सुन्दर काया रो
मत कीजे अभिमान
हंसा सुन्दर काया रो
मत कीजे अभिमान
आखिर इक दिन जाणो है
मन्ने मालिक रे दरबार
आखिर इक दिन जाणो रे
मालिक रे दरबार
कुटुंब कबिलो देख ले
गरब कीयो मन माय रे
कुटुंब कबिलो देख ले
गरब कीयो मन माय
अरे हंस अकेलो जासी रे
कोई ना संग मे जाय
हंस अकेलो जासी रे
कोई ना संग मे जाय
हंसा सुन्दर काया रो
मत कीजे अभिमान रे
हंसा सुन्दर काया रो
मत कीजे अभिमान
आखिर इक दिन जाणो है
तन्ने मालिक रे दरबार
आखिर इक दिन जाणो है
मालिक रे दरबार
राम नाम री बान्ध गाठडी
कर ले भव से पार
राम नाम री बान्ध गाठडी
कर ले भव से पार
प्रीत सुरतिया कहत है
आसी ठावे कान
प्रीत सुरतिया कहत है
आसी ठावे कान
हंसा सुन्दर काया रो
मत कीजे अभिमान रे
हंसा सुन्दर काया रो
मत कीजे अभिमान
आखिर इक दिन जाणो है
मालिक रे दरबार
आखिर इक दिन जाणो है
थन्ने मालिक रे दरबार
आखिर इक दिन जाणो है
मालिक रे दरबार