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सपनों की कश्ती
बह जाए हम भी
लहरों-सी है तू
डूबे हैं हम भी
बोले बिना सब कुछ कहे
मन ये बावरा ना सुने
होने से तेरे ज़िंदगी
ख़ाब-सा जहाँ ये लगे
मिले तुम
मिल गया जहाँ
मिले तुम
मिल गया जहाँ
बिख़री रातें, ठहरे दिन ये
पल कहीं बीत ना जाए
बहके-बहके थोड़ा हम भी
बह जाए हम भी यहीं
आँखों से कह भी दो ना
तुम मुझसे, जो दिल में है
बाँहों में यूँ भर लो ना
सुन लूँ मैं, जो दिल में है
बोले बिना सब कुछ कहे
मन ये बावरा ना सुने
होने से तेरे ज़िंदगी
ख़ाब-सा जहाँ ये लगे
मिले तुम
मिल गया जहाँ
मिले तुम
मिल गया जहाँ
मिले तुम
मिल गया जहाँ
मिले तुम
मिल गया जहाँ