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धीमे-धीमे ऐ ख़याल चल
यादों की गली में तू टहल
धीमे-धीमे ऐ ख़याल चल
यादों की गली में तू टहल
यादों में वो रहती है
ला उसे हक़ीक़तों के घर
बर्फ़ का अक्स है
आहों से ना जाए वो पिघल
वो वहीं है कहीं
थम जा वहीं पे एक पल
वो वहीं है कहीं
सीपियाई रंगों की ग़ज़ल
धीमे-धीमे ऐ ख़याल चल
यादों की गली में तू टहल
संझा सिंदूरी है वो, चंदा चकोरी है वो
बचपन के तकिए पे
करवट बदलती सी अम्मा की लोरी है वो
रात घनेरी है वो, सुबह सुनहरी है वो
पेड़ों के नीचे जो अलसा के गुज़रे
वो नींदी दोपहरी है वो
वो वहीं है कहीं
जहाँ खिलें यादों के कँवल
वो वहीं है कहीं
ख़ाबों की जहाँ खड़ी फ़सल
धीमे-धीमे ऐ ख़याल चल
यादों की गली में तू टहल
यादों में वो रहती है
ला उसे हक़ीक़तों के घर
बर्फ़ का अक्स है
आहों से ना जाए वो पिघल
वो वहीं है कहीं
थम जा वहीं पे एक पल
वो वहीं है कहीं
सीपियाई रंगों की ग़ज़ल