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जिस दिन से नज़र में आए हो तुम
कुछ और नज़र तो आए ना
जिस दिन से नज़र में आए हो तुम
कुछ और नज़र तो आए ना
इसे प्यार कहें या पागलपन?
हो, इसे प्यार कहें या पागलपन?
दिल चैन कहीं भी पाए ना
जिस दिन से नज़र में आए हो तुम
कुछ और नज़र तो आए ना
इसे प्यार कहें या पागलपन?
हो, इसे प्यार कहें या पागलपन?
दिल चैन कहीं भी पाए ना
मेरे ख़यालों में रहने लगे हो तुम
बन के हसीं नज़ारे
सोचा करूँ मैं ये, "रिश्ता है अपना क्या?
तुम कौन हो हमारे?"
हो, मेरे ख़यालों में रहने लगे हो तुम
बन के हसीं नज़ारे
सोचा करूँ मैं ये, "रिश्ता है अपना क्या?
तुम कौन हो हमारे?"
एक तुम ही पसंद हो मेरी, सनम
कोई दूसरा तो भाए ना
इसे प्यार कहें या पागलपन?
हो, इसे प्यार कहें या पागलपन?
दिल चैन कहीं भी पाए ना
दुनिया की हर ख़ुशी मुझको मिली
मगर फिर भी है कुछ कमी सी
देखो तो बेबसी, अपनी ही ज़िंदगी
लगती है अजनबी सी
हो, दुनिया की हर ख़ुशी मुझको मिली
मगर फिर भी है कुछ कमी सी
देखो तो बेबसी, अपनी ही ज़िंदगी
लगती है अजनबी सी
देती है मज़ा क्यूँ दिल की चुभन?
ये राज़ कोई समझाए ना
इसे प्यार कहें या पागलपन?
हो, इसे प्यार कहें या पागलपन?
दिल चैन कहीं भी पाए ना
जिस दिन से नज़र में आए हो तुम