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लिखा ना तुमको ख़त कभी, ना इक़रार किया हमने
दिल ही दिल में आज तक तुमसे प्यार किया हमने
लिखा ना तुमको ख़त कभी, ना इक़रार किया हमने
लिखा ना तुमको ख़त कभी, ना इक़रार किया हमने
दिल ही दिल में आज तक...
हाँ, दिल ही दिल में आज तक तुमसे प्यार किया हमने
लिखा ना तुमको ख़त कभी, ना इक़रार किया हमने
दिल ही दिल में आज तक...
दिल ही दिल में आज तक तुमसे प्यार किया हमने
लिखा ना तुमको ख़त कभी, ना इक़रार किया हमने
ये प्यार क्या हैं आख़िर पूछो तो हमसे
तुम पे ही मरते आए हर इक जनम से
कुछ तो सिला मिल जाए अपनी वफ़ा का
मर जाएँगे हम वरना अब तो क़सम से
हर दिन, हर पल, हर घड़ी...
हर दिन, हर पल, हर घड़ी इंतज़ार किया हमने
लिखा ना तुमको ख़त कभी, ना इक़रार किया हमने
लिखा ना तुमको ख़त कभी, ना इक़रार किया हमने
दिल ने मुलाक़ात के कुछ सपने सजाए
माना अब तक ज़ुबाँ से हम कहना पाए
लेकिन ये सच है के जब से कहाँ है तुमको
जीने की चाहत अपनी बढ़ती ही जाए
जो कुछ भी इस दिल में है...
जो कुछ भी इस दिल में है अब इज़हार किया हमने
लिखा ना तुमको ख़त कभी, ना इक़रार किया हमने
लिखा ना तुमको ख़त कभी, ना इक़रार किया हमने
दिल ही दिल में आज तक...
हाँ, दिल ही दिल में आज तक तुमसे प्यार किया हमने
लिखा ना तुमको ख़त कभी, ना इक़रार किया हमने
लिखा ना तुमको ख़त कभी, ना इक़रार किया हमने
ना इक़रार किया हमने, ना इक़रार किया हमने