Elige una pista para reproducir
Sencillo / Pista
सीने में सुलगती एक आग
बेचैनी बैठी दिल में आज
ख़ामोशी बन जाती तेज़ाब
मुँह मोड़े जब सारा जहाँ
दुनिया है लहू-लुहान
तुम भी हो इसके गवाह
कहते हो (कहते हो) 'गर ख़ुद को इंसान
तो रहते हो (रहते हो) कैसे बे-ज़ुबान?
कोहरे में हम गुम इस तरह
चलें तो चलें फ़िर किस राह
सुन लो ना रूह की पुकार
आओ ना मिलकर ढूँढें नयी सुबह
दुनिया है (दुनिया है) लहू-लुहान
तुम भी हो (तुम भी हो) इसके गवाह
कहते हो (कहते हो) 'गर ख़ुद को इंसान
तो रहते हो (रहते हो) कैसे बे-ज़ुबान?
सीने में सुलगती एक आग
बेचैनी बैठी दिल में आज