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आ आ आ आ आ आ
मेरे महबूब ना जा, ना जा ना जा
मेरे महबूब ना जा, आज की रात ना जा
होने वाली है सहर, थोड़ी देर और ठहर
मेरे महबूब ना जा, आज की रात ना जा
होने वाली है सहर, थोड़ी देर और ठहर
मेरे महबूब ना जा
देख कितना हसीन मौसम है
हर तरफ इक अजीब आलम है
जलवे इस तरह आज निखरे हैं
जैसे तारे ज़मीं पे बिखरे हैं
जैसे तारे ज़मीं पे बिखरे हैं
मेरे महबूब ना जा, आज की रात ना जा
आ आ आ आ आ आ आ
इन्होंने काटे हैं इंतज़ार के दिन
अब जाके आये है बहार के दिन
यूं ना जा दिल की शमा गुल कर के
अभी देखा नहीं है जी भर के
अभी देखा नहीं है जी भर के
मेरे महबूब ना जा
जब तोहर पावं की छावं पाई है
बेकरारी को नींद आई है
इस तरह मत जा यूं ही सोने दे
रात ढलने दे सुबह होने दे
रात ढलने दे सुबह होने दे
मेरे महबूब ना जा, आज की रात ना जा
मेरे महबूब ना जा, आज की रात ना जा
आ आ आ आ आ आ
इस तरह भर उठे नज़र मुझसे
दूर जाएगा तू अगर मुझसे
चांदनी से भी आग बरसेगी
शमा भी रोशनी को तरसेगी
शमा भी रोशनी को तरसेगी
मेरे महबूब ना जा, आज की रात ना जा
मेरे महबूब ना जा, आज की रात ना जा