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सुबाह के 5 बजे
तुम ही जगाते हो
जेसे हो स्कूल का दिन और तुम
मेरी मा
क्यूँ जब तुम रोते हो
सब लोग हंसते हैं?
परिंदे ढूंढते एक घर
अच्छे नसीब वाले
अमीर, गरीब, सारे
कोई कुछ नही
तुम्हारे बिन
बच्चे और बूढ़े सारे
सुनते कहानियाँ
तुम्हारे संग ही
रात और दिन
आँसू की खुश्बू भी हे
फूल भी खिलते हैं
इतना बड़ा तुम्हारा दिल
जब रंग बदलते हो
आचे तो लगते हो
कितने फ़र्क़ हैं ना हम और तुम?
आचे नसीब वाले
अमीर, गरीब, सारे
कोई कुछ नही
तुम्हारे बिन
बच्चे और बूढ़े सारे
सुनते कहानियाँ
तुम्हारे संग ही
रात और दिन
में एक कटरा सा हूँ
छोटा सा नुकता हूँ पर
जब कोई और हो ना
साथ रहेंगे में और तुम