तलाश में हूँ यारो,
न यहाँ आराम है,
न वहाँ आराम है,
इस दुनिया में अब तो,
सुख का सोचना हराम है।
कुछ जलते है हमसे,
कोई हमें पसंद नहीं,
वो प्यार का दिखावा करे,
यह हमें मंज़ूर नहीं।
कोई किसे सुना रहा है,
कोई किस से नाराज है,
लगता है हमें ऐसे जैसे,
मेरी वजह से यह शोर शराबा है।
जिस सुकून को ढूँढ रहा था मै,
वो शायद एक भटकती बंजारन है,
मैं जहाँ जहाँ गया ,
वो वहाँ रुकी नहीं,
शायद वो भी मुझसे खफ़ा है।
अब इस सोच में पड़ा हूँ,
कहाँ मैं करूँ बसेरा?
कहाँ मुझे कम दुख मिलेगा,
जहाँ से हो जीवन में सवेरा।।